#1249 मंजिल धुंदलिसी होती है राहें, अक्सर कश्मकश की कोहरे में लिपटी…
- Posted
- 2024-02-04
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#1249 मंजिल धुंदलिसी होती है राहें, अक्सर कश्मकश की कोहरे में लिपटी हुई! उलझनोको सुलझातेहे सफर यही, कोन है करीब, कोन है हमनवा बतलातेहे वही! मिलते रहते है लोग कई यहां, पल पल में अटककर ना उसके उलझना वहा! यह जान ले तू ,हसीन मोड़ पर है कारवां तेरा, मानके यहीं चलता रह तू , खुबसूरत मंजिल पे पहुंच जाएगा तू! ~संकेत #04:02:2024::11:28:pm
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