#1250 यायावर हूं, परिंदे भी कहते है कई, घूमते हुए मिलते रहते हैं, ह…
- Posted
- 2024-02-04
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#1250 यायावर हूं, परिंदे भी कहते है कई, घूमते हुए मिलते रहते हैं, हमराही कई! दूर कही पहाड़ोसे जब देखता हैं रास्ते को यही, खुबसूरत राह दिखती है उसको वही!! देखकर इन राहो को सोचता है, यहीं तो हैं वह राह जिसपे मिल जायेगी उसको मंजिल कही! राहोपे मिलते रहते है साथी कई, उसमे ना उलझकर चलता रहता है यायावर वही!! #04:02:2024::11:30:pm