#1288 किसी मोड़ पर हुई थीं मुलाकात उनसे, दिक्कत ए थी जनाब, कारवां न…
- Posted
- 2024-06-01
- Type
- text
#1288 किसी मोड़ पर हुई थीं मुलाकात उनसे, दिक्कत ए थी जनाब, कारवां नही बन पाया! अलग थी मंजिले, अंजान थी राहें, शायद इसीलिए नहीं बनी इबादते!! ए नादान दिल, मालूम है इस मुसाफिर को, मुश्किल है जानना खुदकी उन बैचेनियोको! अब तू ही बतादे चमकते चांद रे, क्या दिख रहा है कोई वैसाही मोड़ आगे जिन्दगी में कहीपर!! #०१:०६:२०२४::०२:१४:am