यायावर…! नादान परिंदा हु मे, आसमान की चाह रखता हु| जमीन पे बैठे बैठ…
- Posted
- 2020-02-24
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यायावर…! नादान परिंदा हु मे, आसमान की चाह रखता हु| जमीन पे बैठे बैठे, चांद तारोपर सफर के सपने देखता रहता हू| खुबसुरत साथी मिलते रहते हैं राहो पर यहा, कुछ चंद यादों से वो खुदको यादगार बना जाता है यहा| अकेली इस मुष्कीलों भरे लंबे सफर मे, बस चाह हैं यही एक खुबसुरत, यादगार “यायावर” बना रहू में| #२४:२:२०२०::७:४८:pm